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अंगूठे

  इस दौर में इन अंगूठों की बात ही अलग है इस दौर मैं इन अंगूठों के काम ही अलग है कुछ बाते मुंह पर हम कभी कह नहीं सकते तब इनके जज्बे, हौसलों की बात ही अलग है आमने सामने बातें वातें, गपशप कहाँ होती है सबकुछ तो यहीं बोलता यह बात ही अलग है अंगूठों को अपने फोन पर जब भी नचाते है तब सुकून-ए-दिल आहा: बात ही अलग है इज़हार-ए-मोहोब्बत अंगूठों से किया जाता है अंगूठों से काम चलता इनका साथ ही अलग है